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बकवाँ गांव : चार पीढ़ियों से नर्मदेश्वर शिवलिंग निर्माण की अद्वितीय परंपरा, विश्वस्तरीय शिल्प का केंद्र

इन्दौर। मध्यप्रदेश के खरगोन जिले से 50 किलोमीटर, कसरावद एवं सनावद से 35 किलोमीटर दूर स्थित बकवाँ गांव आज राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट शिल्पपरंपरा के कारण पहचान बना चुका है। यह भारत का एकमात्र स्थान है, जहां पीढ़ियों से नर्मदेश्वर शिवलिंग का निर्माण निरंतर किया जा रहा है। आजादी से पहले आरंभ हुई यह परंपरा अब चौथी पीढ़ी तक जीवंत है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान कर रही है।

परंपरा के जनक: स्वर्गीय मांगीलाल नामदेव

नर्मदेश्वर शिवलिंग निर्माण कार्य की नींव बकवाँ गांव के प्रख्यात शिल्पकार स्व. मांगीलाल नामदेव ने रखी थी। 2006 में उनके स्वर्गवास तक वे इस कला को निखारते रहे और गांव के लगभग 200 परिवारों को यह विशेष कौशल सिखाया। उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप आज गांव के करीब 350 परिवार उसी कला के सहारे जीवन-यापन कर रहे हैं। यह मॉडल ग्रामीण रोजगार और आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है।

चार पीढ़ियों का निरंतर योगदान

मांगीलाल नामदेव के बाद इस परंपरा को आगे बढ़ाया—

  • उनके पुत्र दीपक कुमार नामदेव,

  • भाई शिवनारायण नामदेव,

  • और फिर अगली पीढ़ी के सुशील, हेमंत और हितेश नामदेव ने।

अब चौथी पीढ़ी के युवा सक्षम नामदेव भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे यह कला आधुनिक समय में नई ऊर्जा और दिशा प्राप्त कर रही है।

नामदेव शिवलिंग आर्ट पुरातन: गांव की पहचान

आज बकवाँ गांव की यह परंपरा एक संगठित रूप में ‘नामदेव शिवलिंग आर्ट पुरातन’ संस्था के नाम से जानी जाती है। इस संस्था में लगभग 150 लोग प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत हैं, जो देश-विदेश में भेजे जाने वाले शिवलिंगों को तराशने, नक्काशी और परिष्करण जैसे कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रीय नेतृत्व से वैश्विक पहचान तक

स्वर्गीय मांगीलाल नामदेव की कला को उस समय राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली जब उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को नर्मदेश्वर शिवलिंग भेंट किया।
इसके बाद यह शिल्प विदेशों में भी प्रशंसा का विषय बना और बकवाँ गांव की प्रतिष्ठा वैश्विक मंच पर स्थापित हुई।

विश्व का सबसे विशाल नर्मदेश्वर शिवलिंग

इस परंपरा की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि वह भव्य शिवलिंग है जिसकी—

  • ऊंचाई: 24 फीट

  • वजन: 66 टन

यह अद्वितीय शिवलिंग नामदेव शिवलिंग आर्ट पुरातन द्वारा निर्मित किया गया और आज हैदराबाद में स्थापित है। यह भारत में शिल्पकला की गहराई, तकनीकी दक्षता और आध्यात्मिक परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।


बकवाँ गांव: सांस्कृतिक धरोहर और आत्मनिर्भर भारत की मिसाल

नर्मदेश्वर शिवलिंग का घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता महत्व बकवाँ गांव को न सिर्फ सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है, बल्कि यह गांव ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पारंपरिक कौशल संरक्षण और हस्तशिल्प आधारित उद्योग के रूप में एक राष्ट्रीय मॉडल भी प्रस्तुत करता है।

चार पीढ़ियों से जीवित यह परंपरा आज भी निरंतर विस्तार कर रही है और बकवाँ गांव को अध्यात्म, शिल्प और तकनीक का संगम बनाकर देश-दुनिया में पहचान दिला रही है।

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बकवाँ गांव

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