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गबन और लापरवाही के मामले में जलोदिया पंथ सरपंच बर्खास्त : ₹ 4.28 लाख के विकास कार्यों में गड़बड़ी, सरपंच पद से हटाए गए बलदेव पटेल

Jivan doliya

Fri, Aug 21, 2026

₹ 4.28 लाख के विकास कार्यों में गड़बड़ी, सरपंच पद से हटाए गए बलदेव पटेल

जल निकासी, नल-जल योजना के संचालन और मनरेगा कार्यों में लापरवाही के आरोपों पर बड़ी कार्रवाई; छह वर्ष तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित

देपालपुर। ग्राम पंचायत जलोदियापंथ में मनरेगा सहित विभिन्न विकास कार्यों में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में जनपद पंचायत देपालपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बड़ी कार्रवाई की है। पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत पारित आदेश में ग्राम पंचायत जलोदियापंथ के सरपंच बलदेव पटेल को तत्काल प्रभाव से सरपंच पद से हटा दिया गया है। साथ ही उन्हें पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40(2) एवं 92(5) के तहत छह वर्ष की अवधि के लिए निर्वाचन के लिए निरर्हित घोषित किया गया है। यह कार्रवाई 24 जून 2026 को पारित आदेश में की गई है। इसी मामले में ग्राम पंचायत जलोदियापंथ के सचिव जसवंत सिंह यादव के विरुद्ध मध्यप्रदेश पंचायत सेवा आचरण नियम 1998 तथा मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (ग्राम पंचायत सचिव भर्ती एवं सेवा की शर्तें) नियम 2011 एवं 9 अगस्त 2017 को प्रकाशित संशोधित नियमों के नियम 7 के तहत पृथक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

मनरेगा और ट्रेवल मार्ग निर्माण में ₹4.28 लाख के आहरण का मामला

आदेश में दर्ज जांच निष्कर्षों के अनुसार, मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 89(1) के तहत विस्तृत जांच एवं सुनवाई के बाद यह तथ्य सामने आया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत सामुदायिक वृक्षारोपण कार्य वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 तथा ट्रेवल मार्ग निर्माण कार्य में कुल 4 लाख 28 हजार रुपये का आहरण किया गया। जांच के दौरान कार्यस्थल के भौतिक सत्यापन में एक भी पौधा तथा संबंधित कार्य का भौतिक अस्तित्व नहीं पाया गया। आदेश में इसे शासकीय धन के प्रत्यक्ष दुरुपयोग तथा ग्राम पंचायत कोष की क्षति से जुड़ा गंभीर मामला माना गया है।

राशि जमा करने के निर्देश के बाद भी नहीं लौटाई रकम

मामले में 2 अप्रैल 2026 के आदेश क्रमांक 1747/धारा 89/2026-27 तथा कारण बताओ सूचना पत्र क्रमांक 2267/जि.पं./न्यायालय/2026-27, दिनांक 21 मई 2026 के माध्यम से 4.28 लाख रुपये की अधिरोपित राशि की वसूली के लिए संबंधित को निर्देशित किया गया था। आदेश के अनुसार, पर्याप्त समय बीतने के बावजूद संबंधित राशि जमा नहीं की गई। यहां तक कि 4.28 लाख रुपये में से एक रुपया भी जमा नहीं किए जाने का उल्लेख आदेश में किया गया है। प्राधिकारी ने इसे न्यायालय के आदेश की जानबूझकर अवहेलना की स्थिति माना।

सीएम हेल्पलाइन की छह शिकायतों का भी उल्लेख

मामले में सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायत क्रमांक 37190416, 33491183, 33502710, 36496089, 3649656 एवं 36496605 का भी आदेश में उल्लेख है। इन शिकायतों के संदर्भ में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत देपालपुर द्वारा ग्राम पंचायत जलोदियापंथ में जांच कराई गई थी। जांच प्रतिवेदन क्रमांक 1427, दिनांक 24 अप्रैल 2026 में पंचायत में विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने का उल्लेख किया गया।

गांव में जल निकासी की गंभीर समस्या भी सामने आई

आदेश के दूसरे हिस्से में ग्राम पंचायत जलोदियापंथ क्षेत्र में जल निकासी की गंभीर समस्या का उल्लेख किया गया है। दस्तावेज के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में जलभराव एवं दूषित जल की निकासी का समुचित प्रबंधन नहीं होने के कारण जनस्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष संकट उत्पन्न हो रहा था। आदेश में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 49 के तहत ग्राम पंचायत के अनिवार्य कर्तव्यों तथा धारा 54 के तहत सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा से संबंधित दायित्वों का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि पंचायत को इन जिम्मेदारियों का निर्वहन करना था। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि न्यायालय एवं उच्च अधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया गया।

नल-जल योजना के संचालन में भी गंभीर लापरवाही

मामले में नल-जल योजना के संचालन एवं रखरखाव को लेकर भी पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि शासन से राशि उपलब्ध होने के बावजूद योजना का रखरखाव नहीं कराया गया और न ही इसके खराब होने की सूचना उच्च अधिकारियों को दी गई। जल जीवन मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार नल-जल योजना का निरंतर संचालन एवं रखरखाव सरपंच की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया गया है। इसके बावजूद योजना के संचालन में लापरवाही, उदासीनता एवं अरुचि प्रदर्शित किए जाने का उल्लेख आदेश में है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत देपालपुर के अद्यतन प्रतिवेदन क्रमांक 2180, दिनांक 5 जून 2026 में भी संबंधित स्थिति के यथावत रहने की बात दर्ज की गई है।

तीन बार मिला अपना पक्ष रखने का अवसर

सरपंच बलदेव पटेल को कार्रवाई से पहले अपना पक्ष रखने के लिए तीन बार अवसर दिए जाने का उल्लेख आदेश में किया गया है। संबंधित को अपना जवाब एवं समाधानात्मक पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया, लेकिन आदेश के अनुसार प्रस्तुत जवाब संतोषजनक एवं समाधानकारक नहीं पाया गया। साथ ही अधिरोपित राशि जमा नहीं करने को कर्तव्य के निर्वहन में अवचार एवं दोषपूर्ण आचरण माना गया। आदेश में कहा गया कि ऐसी स्थिति में संबंधित व्यक्ति का धारा 40(1)(ख) के तहत पद पर बने रहना लोकहित में वांछनीय नहीं है।

धारा 40(1) के तहत सरपंच पद से तत्काल हटाया

संपूर्ण जांच, दस्तावेजों, शिकायतों, भौतिक सत्यापन और सुनवाई की प्रक्रिया के आधार पर आदेश में पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 40(1) के अंतर्गत बलदेव पटेल को ग्राम पंचायत जलोदियापंथ के सरपंच पद से तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया गया। इसके साथ ही धारा 40(2) एवं 92(5) के अंतर्गत उन्हें निर्वाचन के लिए छह वर्ष की कालावधि के लिए निरर्हित किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 40 के अंतर्गत दर्ज प्रकरण को इसी स्तर पर समाप्त किया जाता है।

सचिव के विरुद्ध अलग से कार्रवाई

सरपंच के साथ ग्राम पंचायत जलोदियापंथ के सचिव जसवंत सिंह यादव के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि उनके संबंध में सरपंच की तरह पद से हटाने का आदेश नहीं दिया गया, बल्कि मध्यप्रदेश पंचायत सेवा आचरण नियम 1998 तथा मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (ग्राम पंचायत सचिव भर्ती एवं सेवा की शर्तें) नियम 2011 और 9 अगस्त 2017 के संशोधित नियमों के नियम 7 के तहत पृथक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

आदेश तत्काल प्रभावशील, खुले न्यायालय में पारित

आदेश में कहा गया है कि यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा। आदेश को खुले न्यायालय में पारित एवं घोषित किया गया तथा 24 जून 2026 को हस्ताक्षर एवं पदमुद्रा के साथ जारी किया गया।

कार्रवाई से पंचायतों में जवाबदेही का संदेश

जलोडियापंथ पंचायत के मामले में पारित यह आदेश पंचायत स्तर पर शासकीय राशि के उपयोग, मनरेगा कार्यों के भौतिक सत्यापन, जल-निकासी व्यवस्था, नल-जल योजना के संचालन और निर्वाचित प्रतिनिधियों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खास तौर पर ₹4.28 लाख के कार्यों में भौतिक अस्तित्व नहीं मिलने, राशि जमा नहीं किए जाने तथा ग्रामीण क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही के निष्कर्षों के बाद हुई यह कार्रवाई पंचायत प्रतिनिधियों के लिए प्रशासनिक जवाबदेही का स्पष्ट संदेश है। हालांकि, आदेश में दर्ज निष्कर्ष और आरोप प्रशासनिक जांच एवं पारित आदेश पर आधारित हैं; संबंधित पक्ष की ओर से किसी उच्च प्राधिकारी अथवा न्यायिक मंच पर आदेश को चुनौती दिए जाने की स्थिति अलग से विचारणीय होगी।

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