96 तंदूर रेस्टोरेंट को लेकर गंभीर आरोप, पुलिस की निगरानी पर उठे सवाल : सागौर थाना क्षेत्र में कथित अनैतिक गतिविधियों की शिकायतों ने खड़े किए गंभीर सवाल
SANDEEP SEN Editor
Thu, Aug 13, 2026
सागौर। इंदौर-मुंबई फोरलेन से जुड़े सागौर थाना क्षेत्र में संचालित 96 तंदूर रेस्टोरेंट को लेकर कथित रूप से अनैतिक गतिविधियां संचालित होने के आरोप सामने आने के बाद पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लगाए जा रहे आरोपों में रेस्टोरेंट की आड़ में देह व्यापार जैसी गतिविधियां संचालित होने की बात कही जा रही है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार राहुल और बंटी नामक युवकों की कथित भूमिका को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक प्रतिष्ठान का मामला नहीं, बल्कि क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और पुलिस की प्रभावी निगरानी से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
थाना प्रभारी की जिम्मेदारी पर उठे सवाल
सागौर जैसे महत्वपूर्ण थाना क्षेत्र की जिम्मेदारी थाना प्रभारी प्रकाश सरोदे के पास है। वहीं संबंधित बीट की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में यदि किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान में लंबे समय से कानून-विरुद्ध गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें सामने आती हैं तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि स्थानीय पुलिस की सूचना तंत्र और बीट निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है? धार पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने जिस विश्वास के साथ सागौर थाना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की कमान थाना प्रभारी को सौंपी है, उस विश्वास की कसौटी पर पुलिस की कार्यप्रणाली को खरा उतरना जरूरी है। किसी भी थाना क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की शिकायत सामने आने पर पुलिस का दायित्व केवल कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि ऐसी गतिविधियों को पनपने से पहले रोकना भी है।
वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में हो जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग है कि 96 तंदूर रेस्टोरेंट से संबंधित शिकायतों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और गोपनीय स्तर पर जांच कराई जाए। प्रतिष्ठान के सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों एवं संचालकों की भूमिका, आने-जाने वालों की गतिविधियां तथा पूर्व में मिली शिकायतों की जांच की जाए। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के साथ-साथ जिम्मेदारी तय करते हुए उन अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए, जिनके थाना क्षेत्र में यह गतिविधियां संचालित होने का आरोप है।
महिला सुरक्षा और सामाजिक वातावरण का सवाल
देह व्यापार जैसी गतिविधियां केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि इनके सामाजिक प्रभाव भी गंभीर होते हैं। ऐसे मामलों में महिलाओं के शोषण, मानव तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों की संभावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए किसी भी शिकायत को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय कानून के अनुसार पारदर्शी कार्रवाई होना आवश्यक है।
धार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा भी यदि इस मामले को गंभीरता से लिया जाता है तो जांच को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए जमीनी स्तर पर सत्यापन और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है।
सवाल जिनके जवाब जरूरी
- क्या 96 तंदूर रेस्टोरेंट के संबंध में पुलिस को पहले से कोई शिकायत मिली थी?
- यदि शिकायत मिली थी तो उस पर क्या कार्रवाई की गई?
- संबंधित बीट में नियमित पुलिस निगरानी और सत्यापन किस स्तर पर किया गया?
- रेस्टोरेंट में काम करने वाले कर्मचारियों और संचालकों का पुलिस सत्यापन हुआ है या नहीं?
- लगाए जा रहे देह व्यापार के आरोपों की पुलिस ने जांच की है या नहीं?
- यदि आरोप निराधार हैं तो पुलिस तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करती?
सागौर की जनता को कानून-व्यवस्था पर भरोसा तभी मजबूत होगा, जब किसी भी व्यक्ति या प्रतिष्ठान के प्रति बिना भेदभाव के कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। आरोप सही हों तो कठोर कार्रवाई और आरोप गलत हों तो स्पष्ट जांच के माध्यम से सच्चाई सामने लाना—दोनों ही पुलिस की जिम्मेदारी हैं।
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