सुशील महाराज ने दिए धर्म व सदाचार के संदेश : राम नवमी व नववर्ष पर जामुनिया में भागवत कथा
SANDEEP SEN Editor
Sun, Mar 22, 2026
खकनार | संवाददाता
खकनार क्षेत्र के ग्राम जामुनिया स्थित श्री राम नगरी में राम नवमी एवं नववर्ष के पावन अवसर पर प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा एवं हरिनाम संकीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। कथा का वाचन ब्रह्मपुर के पूज्य पंडित सुशील चोरे जी महाराज के मुखारविंद से किया जा रहा है।
कथा के तीसरे दिवस महाराज श्री ने राजा परीक्षित एवं शुकदेव जी के प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि जीवन में कभी भी अधर्म का मार्ग नहीं अपनाना चाहिए और न ही अधर्म से जुड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भागवत कथा हमें सिखाती है कि सदैव अच्छे कर्म करें, किसी का धन लिया हो तो उसे लौटाएं तथा चोरी जैसे पाप कर्मों से दूर रहें। अधर्म से अर्जित धन अधिक समय तक टिकता नहीं है।
महाराज श्री ने वर्तमान समय में दान, दया, पवित्रता एवं सत्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कलयुग में धर्म मुख्यतः दान पर टिका हुआ है, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को धार्मिक आयोजनों में अपनी सामर्थ्य अनुसार दान अवश्य करना चाहिए। साथ ही उन्होंने गर्मी के मौसम में पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी एक बड़ा पुण्य कार्य बताया।
कथा के दौरान उन्होंने समाज में बढ़ती जातिवाद की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान के समक्ष सभी समान हैं और किसी भी प्रकार का भेदभाव उचित नहीं है। मनुष्य को अच्छे संग का चयन करना चाहिए तथा बुरे संग का त्याग करना चाहिए। उन्होंने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान ने कभी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया।
अंत में भगवान की भक्ति, सत्संग और सदाचारपूर्ण जीवन अपनाने का संदेश देते हुए कथा का समापन किया गया। कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्मलाभ ले रहे हैं।
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